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ज्ञान परंपरा और गोमाता की रक्षा करते हैं अयोध्या के राजा : मुख्यमंत्री योगी

अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित भगवान मुनि सुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ऋषभदेव जन्मभूमि द्वार एवं 101 भगवान जिनमंदिर का लोकार्पण किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का गौरवशाली इतिहास रहा है और यहां के राजा ज्ञान परंपरा तथा गोमाता दोनों की रक्षा करते आए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जीव मात्र के कल्याण की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि हर परिवार का संस्कार रहा है कि पहला ग्रास गोमाता और अंतिम ग्रास श्वान के लिए होता है। यही “जियो और जीने दो” की भावना है, जो सभी जीवों के प्रति करुणा और संरक्षण का संदेश देती है।

योगी आदित्यनाथ ने जैन समाज से विशेष अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक जैन परिवार को कम से कम एक गाय के पालन-पोषण का खर्च अवश्य उठाना चाहिए। यदि संभव हो तो गोशालाओं को गोद लेकर गोसंरक्षण और संवर्धन में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोमाता की रक्षा भारतीय संस्कृति, जैन धर्म और वैदिक सनातन परंपरा की रक्षा के समान है।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्वच्छता, पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने वाले प्रत्येक अभियान से समाज को जुड़ना चाहिए।

अयोध्या की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जन्मभूमि अयोध्या है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के राजा को धरती का राजा माना जाता था और भगवान ऋषभदेव के पुत्र जड़ भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत पड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती जैन धर्म की दृष्टि से अत्यंत पवित्र है। 24 जैन तीर्थंकरों में से सर्वाधिक तीर्थंकरों का प्रकटीकरण इसी प्रदेश में हुआ है। इनमें पांच तीर्थंकरों का जन्म अयोध्या में हुआ, जबकि काशी, श्रावस्ती, हस्तिनापुर और कुशीनगर भी जैन परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आत्म-अनुशासन ही अच्छे शासन की आधारशिला है। जो व्यक्ति स्वयं पर अनुशासन नहीं रख सकता, वह दूसरों का मार्गदर्शन या शासन नहीं कर सकता। जैन तीर्थंकरों ने अपने तप, साधना और वाणी के माध्यम से विश्व मानवता को अनुशासन, अहिंसा और कल्याण का मार्ग दिखाया है।

कार्यक्रम में पीठाधीश्वर रविंद्र कीर्ति स्वामी ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर जन्मदिवस की शुभकामनाएं भी दीं। इस अवसर पर जैन साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी, चंदनामती माता जी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेदप्रकाश गुप्त सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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