
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट क्षेत्र संकट के दौर से गुजर रहा है। शहर में बीस हजार 700 से ज्यादा फ्लैट्स खाली पड़े हैं, जिनके लिए खरीदारों का अभाव है। सरकारी एजेंसियों और बिल्डरों का करोड़ों रुपया इन खाली फ्लैट्स में फंसा हुआ है, जिससे उनका वित्तीय स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लैट्स की कीमतें अधिक होने और जगह कम होने के कारण ग्राहकों की रुचि में कमी आई है। इसके अतिरिक्त, शहर के बाहरी इलाकों में स्थित फ्लैट्स भी खरीदारों को आकर्षित करने में असफल हो रहे हैं। सुशांत गोल्फ सिटी, रायबरेली रोड और अयोध्या रोड पर स्थित अपार्टमेंट्स भी खाली पड़े हैं।
इस संकट का सबसे बड़ा कारण यह है कि पुराने फ्लैट्स की बिक्री में सुस्ती के चलते बिल्डर नई परियोजनाएं लाने से घबरा रहे हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि रियल एस्टेट मार्केट में गतिरोध बना हुआ है।
बिल्डरों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो रियल एस्टेट सेक्टर में गंभीर वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है। वहीं, खरीदारों का कहना है कि ऊंची कीमतों और बाहरी स्थानों की वजह से वे फ्लैट्स खरीदने से परहेज कर रहे हैं।
सरकार और रियल एस्टेट एजेंसियों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, ताकि रियल एस्टेट मार्केट में फिर से तेजी आ सके और फ्लैट्स की बिक्री में सुधार हो सके। फिलहाल, लखनऊ में फ्लैट्स की बिक्री में आई गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है।